2020 क्या खुब जिया होली में नहाकर बदरंग हो गये दहशत को अपनी झोली से निकलकर रख दिया समय की नब्ज पर नंगे पांव, खुरदुरी जमीन पर फटे पैर रगड़ते गये लोग, महानगरों से खदेड़े आमजन बंद हुए चुल्हे,चौके हस्पतालों में लगे लाशों के ढेर शासकों ने ढोल पिटवाया दीप जलवाये पर अच्छे दिन नहीं आये बरबस आंखें बरसतीं रहीं किसान से साहूकार तक झुलसते रहे तुम दिन,महीने बदरंग होते रहे तुम कब जाओगे एक बड़ा प्रश्न था हजारों कम्पनियां, लाखों वैज्ञानिक जूझते रहें तुम्हारे औरे से निजात के लिए निष्कर्षत:इंसानी जीव ने खोज निकाला अलविदा २०२०।। अरे! तुम्हारी आंखें झुकी क्यूं है? बरस रहीं? तुम शर्मिंदा हो? जाने दो जब २१सदी इतिहास के पन्नों में दर्ज होगी तो लिखी जायेगी हम होंगे साक्षी बनेंगे मजबूत कवच अनुभवी, धैर्यवान मजबूत, फौलादी इंसान।।